Category: नेशनल

गजेरा ट्रस्ट की अनोखी पहल स्कूल के शिक्षक वीडियो के जरिए छात्रों को पढ़ा रहे है

सूरत। 1993 से श्रीमती शांताबेन हरीभाई गजेरा चेरिटेबल ट्रस्ट शिक्षण, स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है। हाल के समय में COVID-19 CORONA वायरस के संक्रमण के कारण खड़ी होने वाली स्थिति में स्कूलों बंद है। परीक्षाएं मौकूफ रखी जा रही है ऐसे में गजेरा ट्रस्ट द्वारा बच्चों को शिक्षा के लिए अलग पहल की है। ट्रस्ट संचालित सभी स्कूलों के शिक्षकों अपने-अपने घर रहकर शैक्षिक साधनों के उपयोग के साथ काफी अच्छा शैक्षिक कार्य का विडियो तैयार करते हैं। यह विडियो फेसबूक पर तथा ट्स्ट की वेबसाईट पर प्रसारित करते हैं। कक्षा-1 से 12 और बाल भवन के छात्रों के लिए तैयार किए यह स्टडी मटिरियल का उपयोग बच्चों घर पर बैठे – बैठे कर रहे हैं। इतना ही नहीं किन्तु बच्चों को प्रेक्टिस हो इसके लिए वर्कशीट तैयार कर स्कूल की वेबसाईट WWW.gajeratrust.org पर तथा स्कूल की GEMS एप्लीकेशन द्वारा बच्चों को पहुंचाया जाता है। ट्रस्ट द्वारा किए गए यह कार्य द्वारा बच्चों खुद की गति को और खुद की पद्धति से स्वअध्ययन कर रहे हैं। लर्न-अनलर्न और रीलर्न के कोन्सेप्ट को सफल करने वाली यह पद्धति बच्चों को काफी उपयोगी साबित हो रही है। इसके लिए स्कूल के ट्रस्टी श्री  चुनीभाई गजेरा ने यह सुंदर कार्य करने के बदल सभी शिक्षकों को शुभेच्छा दी और बच्चों को और अधिक उपयोगी होने के लिए प्रेरित किए थे। सांप्रत समय में सभी स्कूलों को इस तरह बच्चों को उपयोगी हो रही है।

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लॉक डाउन के दौरान दांतो के मरीजों के लिए सुम्मिरो की ओर से निशुल्क सेवा का आरंभ

सूरत। लॉक डाउन के दौरान भले लोग घरों में हैै, व्यापार, व्यवसाय बंद है। फिर भी लोग किसी न किसी तरह लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे है। इस दौरान सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक के सुम्मिरो फाउंडेशन भी दांतों के मरीजों के लिए आगे आया है।
सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक के निष्णांत डॉक्टर्स की ओर से दांतो की बीमारी के मरीजों के लिए वीडियो कंसल्टिंग द्वारा निशुल्क सेवा शुरू की है। वीडियो कंसल्टिंग के साथ ही वह मरीज को जरूरी मार्गदर्शन और दवाइयां लिखकर दे रहे है। डॉ. ऊष्मा कक्कड़ ने बताया कि हर महीने बड़ी संख्या में दांतों की बीमारी से पीड़ित मरीज आते है। फिलहाल लॉक डाउन के कारण भले ही चिकित्सा सेवा शुरू हो, लेकिन दांतों के दवाखाने अधिकतर बंद है। ऐसे में मरीजों को मुश्किल ना हो और समय पर उन्हें उपचार मिले इसलिए सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक की ओर से निशुल्क सेवा शुरू की गई है। लॉक डाउन के दौरान दांतो की बीमारी से पीड़ित कोई भी मरीज इस नंबर 9377777909 पर संपर्क कर निशुल्क सेवा का लाभ ले सकते है।

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चिडियाओं के संरक्षण के लिए ग्रीनमेन विरल देसाई ने की नई पहल

सुरत : आज कल शहरों में चिडियाओं की संख्या में कमी हो रही है और कई क्षेत्रों में तो ऐसा है कि एक चिडिया भी नजर नहीं आ रही। ऐसे समय में पर्यावरणविद विरल देसाई शहरों में चिडियाओं की संख्या में बढोतरी हो इसके लिए प्रशंसनीय कदम उठाया है, जहां उन्होंने गुजरातभर में कई लोगों को चिडियाओं के चिडियाघर का तोहफा दिया है, जबकि ग्रीन उधना स्टेशन पर भी उन्होंने बडे पैमाने पर चिडियाओं के लिए चिडियाघर, फीडर और पानी की व्यवस्था की है।

गौरतलब है कि विरल देसाई ने उधना स्टेशन के पास इन्डियन रेलवे का पहला अर्बन फोरेस्ट तैयार किया है, जहां उन्होंने 1100 से अधिक नेटिव पौधे लगाए हैं। यह वन में अब कई पक्षियों आवन-जावन करते हो गए हैं, किन्तु वहां अन्य बडे पक्षियों की तुलना में चिडिया कम आती है। जिसे सुलझाते हुए उन्होंने उधना के पास अर्बन फोरेस्ट पर चिडियाओं के लिये चिडियाघर, उनके खुराक के लिए फिडर और पानी की व्यवस्था की है, जिससे चिडिया को खुराक-पानी के लिए अधिक संघर्ष न करना पडे और वह आसानी से बस सके।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि, हाल के समय में शहरों में चिड़ियाँ की उपस्थिति के संदर्भ में जो आंक आ रहे हैं वह काफी चोंकानेवाले हैं। हमारी इको सिस्टम से लेकर हमारे साहित्य तथा हमारे बचपन की यादों में चिड़ियाँ का अनन्य स्थान है और इसिलिए ही शहरों में चिड़ियाँ की संख्या बढाने की बारे पर मैं काफी गंभीर हुं। हम अगर हमारे घर के आसपास या घर की बाल्कनी – खिड़कियों में चिड़ियाँ के चिडियाघर की व्यवस्था कर देंगे तो जरूर चिड़ियाँ इसमें आएंगी और निर्भयपूर्वक जी सकेंगी, इसके तहत उनकी संख्या में भी बढोतरी होंगी।

आपको बता दे कि इस तरह विरल देसाई ने चारसों से अधिक चिडियाघरों का वितरण किया है और लोगों को चिड़ियाँ के संरक्षण के लिए लोग आगे आए इस तरह की पहल की है।

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