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ध वेडिंग म्युजियम के लोन्च के साथ लोकडाउन में नए वर्च्युअल वर्ल्ड के दरवाजे खुले

प्रोक्रिएट ब्रान्ड्स एन्ड इवेन्ट्स द्वारा 18 मई, 2020 के रोज इन्टरनेशनल म्युजियम डे के अवसर पर पेज लोन्च किया

सूरत : हमारी संस्कृति मुश्किल समय में बाहर लाने का मार्ग बता रही है और मानवी होने की महत्वता समजाती है। वर्च्यअल विश्व ने लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के साथ-साथ हमें मनोरंजन, संदेशाव्यवहार और कार्य के नए अभिगम को ढूंढने में मदद की है तथा हमें हंमेशा कुछ नया सीखते रहने के लिए सक्षम बनाया है।

यह प्रकार की एक नई और अनोखी पहल ध वेडिंग म्युजियम है, जहां किसी भी व्यक्ति विश्वभर में शादी के साथ जुडी संस्कृति और वारसा को ढूंढ सकता है। सूरत की विश्वसनीय इवेन्ट क्युरेटिंग कंपनी प्रोक्रिएट ब्रान्ड्स एन्ड इवेन्ट्स द्वारा कल्पना किए वेडिंग म्युजियम की वेबसाईट / पेज को 18 मई को इन्टरनेशनल म्युजियम डे के अवसर पर लाईव किया गया था।

विश्व के इतिहास में शादी संबंधित कई कहानियों, धार्मिक विधियों और आंतर सांस्कृतिक जुडे हुए हैं। ध वेडिंग म्युजियम की टीम लग्नोत्सव संबंधित विचारधाराओ किस तरह समय पर विकसीत हो इसकी सुंदर और रसप्रद जानकारी प्राप्त करने के लिए हंमेशा उत्सुक रही है। जिससे टीम शादी संबंधित ऐतिहासिक और प्रवर्तमान जानकारी के साथ साथ कम प्रचलित तथ्यो और उनके संलग्न बाबतों को पेश करने का प्रयास किया है।

इस प्लेटफार्म इन्स्टाग्राम उपर लोन्च होने के केवल दो दिन में ही 27,000 से अधिक व्यू के साथ बेजोड प्रतिसाद मिला है, जो दर्शाता है कि विश्वभर में लोग रसप्रद हकीकत जानने इच्छुक है। ध वेडिंग म्युजियम शादी संबंधित सभी बाबतो यानि की वर्ल्ड रिकार्ड्स, पौराणिक महत्वता वाली शादी, प्राचीन शादी के आभूषण और ज्वेलरी, रोयल वेडिंग, पौराणिक धार्मिक विधियों इत्यादि समेत की जानकारी का भंडार उपलब्ध कराता है। ध वेडिंग म्युजियम का उद्देश्य आगामी समय में दर्शको समक्ष शादी संबंधित रोचक तथ्यो और रसप्रद जानकारी का भंडार पेश करने का है।

इस अवसर पर टीम ने बताया कि, जब तुम ध वेडिंग म्युजियम देखेंगे तब तुम्हारे विचारों को भूतकाल में ले जाकर कल्पनाशक्ति को जीवंत बनाने का प्रयास किजीए, जिससे आप यह सुंदर कार्य को अनुभव कर सकोंगे और इसमें से प्रेरणा भी प्राप्त कर सकोगे।

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PPE Kit के लिए वरदान बनी गारमेंट कटिंग मशीन

सूरत, गुजरात : FASHIONOVA, जिसे इसी साल भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप इंडिया की मान्यता प्राप्त हुई, अपने अथक प्रयासों से भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र सूरत में पहली गारमेंट कटिंग मशीन की सुविधा उपलब्ध कराई है सर्वव्यापी महामारी के दौरान यह मशीन प्रतिदिन 3000 PPE Kit का उत्पादन करने में सहयोग प्रदान कर रही है तथा यह मशीन PPE Kit के उत्पादन के लिए एक वरदान साबित हुई है
डॉक्टर, नर्स, पुलिस कर्मचारी, SMC कर्मचारी व अन्य कई ऐसे विभाग जहां PPE Kit की जरूरत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है ऐसे समय में FASHIONOVA के संचालक अनुपम गोयल का कहना है कि उनकी पूरी टीम इस मशीन की क्षमता को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे यह जरूरत और जल्द पूरी की जा सके
इस मशीन के माध्यम से, आज के समय की पहली प्राथमिकता सोशल डिस्टेंसिंग, का भी पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है I जो कर्मचारी इस मशीन को चला रहे हैं वह दूर-दूर रहकर मशीन पर कार्यरत है I यह मशीन फेस मास्क के लिए कपड़ा काटने में भी पूर्ण रूप से सक्षम है I
इस मशीन के माध्यम से किसी भी तरीके का कपड़ा कम से कम wastage से काटा जा सकता है व शीघ्र उपलब्ध कराया जा सकता है I

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पशुओं के लिए व्यवस्था करने की मांग

सूरत,गुजरात : शहर में कई संस्थाएं कार्य कर रही है। पशु भी आपने समाज का एक हिस्सा है। हाल के समय में पशुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।  कोरोना के चलते लोग घर में बैठे हुए ।पंछी पक्षों के लिए अपना गुजारा चलाना मुश्किल है। सामाजिक कार्यकर्ता और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सदस्य निकेत पटेल ने बताया कि पशुओं के लिए व्यवस्था करने की कलेक्टर और पुलिस आयुक्तों को भी मेल दौरा मांग की गई है डॉग्स शहर के अलग-अलग पुस्तक जैसे कि वेसू पाल मैं बड़े-बड़े अपार्टमेंट है वह लोग घर से बाहर नहीं निकलते जिससे पशुओं को खुराक नहीं मिल रहा है। ऐसे संजोग में उनका बर्ताव बदल रहा है पहले लोग पक्षियों के लिए दाना डालते थे वह भी फिलहाल बंद है। पेट डॉग्स कैट्स लोगों के घरों में पेट डॉग से उनके संबंधित दुकान बंद होने से उनके खुराक और दवा की व्यवस्था फ़िलहाल नहीं हो पा रही है। शहर में प्राणी और पक्षों के लिए काम करने वाली संस्था जैसे कि प्रयास और अन्य वॉलंटरी काम करने के लिए तैयार है। कार्यकर्ताओं को आई कार्ड बनाने की छूट दी जाए तो इसके अलावा पशु संबंधित दवाखाना पेट शॉप खुले रखने की मांग की है।

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व्हाईट लोट्स इन्टरनेशनल स्कूल ने डिजिटल माध्यम से शिक्षा देने की शुरूआत की

सूरत, 30 मार्च, 2020 : समग्र विश्व में कोरोना वाईरस तेज गति से फैलने का खतरा पैदा हुआ है। भारत के एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हम सभी को एक दूसरे के साथ अंतर बनाना आवश्यक है। यह गंभीर स्थिति में व्हाईट लोट्स इन्टरनेशनल स्कूल के चेयरमैन वी. के. शर्मा ने बताया था कि, स्वास्थ्य और मानवजाति की सलामती के लिए लिए गए सभी कदमों का मैं पूर्ण रूप से समर्थन करता हुँ, किन्तु मेरा मानना है कि जीवन रूक जाना नहीं चाहिए। हमें मिले अवसरों में से सर्जन करना चाहिए और छात्रों को आगामी शैक्षिक सत्र में ले जाने के लिए सोचना चाहिए।
बच्चे समय पर शिक्षा से लंबे समय तक वंचित रहने के कारण असंमजस का अनुभव कर रहे हैं व वर्ष के दूसरे स्तर में उनके पर अध्ययन पूर्ण करने का बोज पैदा होने का भी अनुभव कर रहे हैं। ऐसी स्थिति को ध्यान में लेकर एस्टर इन्स्टिट्यूशन्स का हिस्सा व्हाईट लोट्स इन्टरनेशनल स्कूल ने टेक्नोलोजी का अच्छा उपयोग कर इसके द्वारा वर्च्युअल वर्ल्ड का मार्ग अपनाया है, जिसके द्वारा छात्रों के ज्ञान में बढोतरी कर सकेंगे व वह विभिन्न विषयों समझ प्राप्त कर सकेंगे। इस पहल अन्तर्गत स्कूल के प्रिन्सिपाल पूर्विका सोलंकी ने छात्रों के लिए ओनलाईन ट्रेनिंग क्लासिस का प्रारंभ किया है। यह समग्र प्रोग्राम नियमित टाईमटेबल, छात्रों की उपस्थिति तथा अध्ययन के परिणाम जांच करने जैसी महत्वपूर्ण बाबतों को लक्ष्य में रखकर संभलपूर्वक डिजाईन किया गया है। यह इन्टरेक्टिव सेशन में छात्रों शिक्षको को प्रश्नों पूछ सकेंगे, जिसका उत्तर क्लास पूर्ण हो उसके पूर्व दिया जाएंगा। पावर पोईन्ट प्रेजन्टेशन, विज्युअल डेमोन्स्ट्रेशन, फ्लेशकार्ड तथा चौक और बोर्ड का उपयोग कर उसके द्वारा शिक्षा दी जाएंगी। स्कूल एप्लिकेशन पर मटिरियल और वर्कशीट अपलोड किया जाएंगा, जिससे अध्ययन संपूर्ण और स्पष्ट रह सके। प्राईमरी और सेकन्डरी स्कूल के लिए क्लासिस 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होंगी, जबकि सिनियर सेकन्डरी के लिए ह्युमनिटिज, कोमर्स और सायन्स के क्लासिस 21 मार्च से शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि स्कूल ने क्लासरूम देखने माहौल का निर्माण करने में सफल रही है और यह टेक्नोलोजी द्वारा अध्ययन प्रदान करने की दिशा में दर्ज करने योग्य कदम है।

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गजेरा ट्रस्ट की अनोखी पहल स्कूल के शिक्षक वीडियो के जरिए छात्रों को पढ़ा रहे है

सूरत। 1993 से श्रीमती शांताबेन हरीभाई गजेरा चेरिटेबल ट्रस्ट शिक्षण, स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है। हाल के समय में COVID-19 CORONA वायरस के संक्रमण के कारण खड़ी होने वाली स्थिति में स्कूलों बंद है। परीक्षाएं मौकूफ रखी जा रही है ऐसे में गजेरा ट्रस्ट द्वारा बच्चों को शिक्षा के लिए अलग पहल की है। ट्रस्ट संचालित सभी स्कूलों के शिक्षकों अपने-अपने घर रहकर शैक्षिक साधनों के उपयोग के साथ काफी अच्छा शैक्षिक कार्य का विडियो तैयार करते हैं। यह विडियो फेसबूक पर तथा ट्स्ट की वेबसाईट पर प्रसारित करते हैं। कक्षा-1 से 12 और बाल भवन के छात्रों के लिए तैयार किए यह स्टडी मटिरियल का उपयोग बच्चों घर पर बैठे – बैठे कर रहे हैं। इतना ही नहीं किन्तु बच्चों को प्रेक्टिस हो इसके लिए वर्कशीट तैयार कर स्कूल की वेबसाईट WWW.gajeratrust.org पर तथा स्कूल की GEMS एप्लीकेशन द्वारा बच्चों को पहुंचाया जाता है। ट्रस्ट द्वारा किए गए यह कार्य द्वारा बच्चों खुद की गति को और खुद की पद्धति से स्वअध्ययन कर रहे हैं। लर्न-अनलर्न और रीलर्न के कोन्सेप्ट को सफल करने वाली यह पद्धति बच्चों को काफी उपयोगी साबित हो रही है। इसके लिए स्कूल के ट्रस्टी श्री  चुनीभाई गजेरा ने यह सुंदर कार्य करने के बदल सभी शिक्षकों को शुभेच्छा दी और बच्चों को और अधिक उपयोगी होने के लिए प्रेरित किए थे। सांप्रत समय में सभी स्कूलों को इस तरह बच्चों को उपयोगी हो रही है।

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लॉक डाउन के दौरान दांतो के मरीजों के लिए सुम्मिरो की ओर से निशुल्क सेवा का आरंभ

सूरत। लॉक डाउन के दौरान भले लोग घरों में हैै, व्यापार, व्यवसाय बंद है। फिर भी लोग किसी न किसी तरह लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे है। इस दौरान सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक के सुम्मिरो फाउंडेशन भी दांतों के मरीजों के लिए आगे आया है।
सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक के निष्णांत डॉक्टर्स की ओर से दांतो की बीमारी के मरीजों के लिए वीडियो कंसल्टिंग द्वारा निशुल्क सेवा शुरू की है। वीडियो कंसल्टिंग के साथ ही वह मरीज को जरूरी मार्गदर्शन और दवाइयां लिखकर दे रहे है। डॉ. ऊष्मा कक्कड़ ने बताया कि हर महीने बड़ी संख्या में दांतों की बीमारी से पीड़ित मरीज आते है। फिलहाल लॉक डाउन के कारण भले ही चिकित्सा सेवा शुरू हो, लेकिन दांतों के दवाखाने अधिकतर बंद है। ऐसे में मरीजों को मुश्किल ना हो और समय पर उन्हें उपचार मिले इसलिए सुम्मिरो डेंटल क्लीनिक की ओर से निशुल्क सेवा शुरू की गई है। लॉक डाउन के दौरान दांतो की बीमारी से पीड़ित कोई भी मरीज इस नंबर 9377777909 पर संपर्क कर निशुल्क सेवा का लाभ ले सकते है।

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लॉक डाउन के दौरान चमड़ी के मरीजों के लिए निशुल्क टेलीडरमेटोलॉजी सेवा

सूरत। लॉक डाउन के दौरान भले लोग घरों में हैै, व्यापार, व्यवसाय बंद है। फिर भी लोग किसी न किसी तरह लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे है। इस दौरान डर्मोटिलोजिस्ट डॉ. जगदीश सखिया ने भी चमड़ी की बीमारी के मरीजों के लिए निशुल्क टेलीडरमेटोलॉजी सेवा शुरू की है। वीडियो कंसल्टिंग के साथ ही वह मरीज को जरूरी मार्गदर्शन और दवाइयां लिखकर दे रहे है। डॉ. जगदीश सखियां ने बताया कि हर महीने करीब नए एक लाख चमड़ी की बीमारी से पीड़ित मरीज आते है। फिलहाल लॉक डाउन के कारण चमड़ी की बीमारी का उपचार करने वाले ज्यादातर क्लीनिक बंद है, ऐसे में मरीजों को मुश्किल ना हो और समय पर उन्हें उपचार मिले इसलिए सखिया स्किन क्लीनिक की ओर से निशुल्क सेवा शुरू की गई है। लॉक डाउन के दौरान चमड़ी की बीमारी से पीड़ित कोई भी मरीज संपर्क नंबर पर संपर्क करेगा उसकी बीमारी का निदान कर जरूरी मार्गदर्शन और दवाइयां लिखकर दी जाएगी। निशुल्क मार्गदर्शन के लिए इस टोल फ्री नम्बर पर संपर्क करे 1800120070000

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चिडियाओं के संरक्षण के लिए ग्रीनमेन विरल देसाई ने की नई पहल

सुरत : आज कल शहरों में चिडियाओं की संख्या में कमी हो रही है और कई क्षेत्रों में तो ऐसा है कि एक चिडिया भी नजर नहीं आ रही। ऐसे समय में पर्यावरणविद विरल देसाई शहरों में चिडियाओं की संख्या में बढोतरी हो इसके लिए प्रशंसनीय कदम उठाया है, जहां उन्होंने गुजरातभर में कई लोगों को चिडियाओं के चिडियाघर का तोहफा दिया है, जबकि ग्रीन उधना स्टेशन पर भी उन्होंने बडे पैमाने पर चिडियाओं के लिए चिडियाघर, फीडर और पानी की व्यवस्था की है।

गौरतलब है कि विरल देसाई ने उधना स्टेशन के पास इन्डियन रेलवे का पहला अर्बन फोरेस्ट तैयार किया है, जहां उन्होंने 1100 से अधिक नेटिव पौधे लगाए हैं। यह वन में अब कई पक्षियों आवन-जावन करते हो गए हैं, किन्तु वहां अन्य बडे पक्षियों की तुलना में चिडिया कम आती है। जिसे सुलझाते हुए उन्होंने उधना के पास अर्बन फोरेस्ट पर चिडियाओं के लिये चिडियाघर, उनके खुराक के लिए फिडर और पानी की व्यवस्था की है, जिससे चिडिया को खुराक-पानी के लिए अधिक संघर्ष न करना पडे और वह आसानी से बस सके।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि, हाल के समय में शहरों में चिड़ियाँ की उपस्थिति के संदर्भ में जो आंक आ रहे हैं वह काफी चोंकानेवाले हैं। हमारी इको सिस्टम से लेकर हमारे साहित्य तथा हमारे बचपन की यादों में चिड़ियाँ का अनन्य स्थान है और इसिलिए ही शहरों में चिड़ियाँ की संख्या बढाने की बारे पर मैं काफी गंभीर हुं। हम अगर हमारे घर के आसपास या घर की बाल्कनी – खिड़कियों में चिड़ियाँ के चिडियाघर की व्यवस्था कर देंगे तो जरूर चिड़ियाँ इसमें आएंगी और निर्भयपूर्वक जी सकेंगी, इसके तहत उनकी संख्या में भी बढोतरी होंगी।

आपको बता दे कि इस तरह विरल देसाई ने चारसों से अधिक चिडियाघरों का वितरण किया है और लोगों को चिड़ियाँ के संरक्षण के लिए लोग आगे आए इस तरह की पहल की है।

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सुरती बच्चों ने बनाई विश्व की पहली ‘कोरोना ड्राइंग बुक’

सूरत : आज पूरे विश्व में हर जगह कोरोना पर चर्चा हो रही है । कोरोना वैश्विक समस्या हो गई है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर डॉ. बनकर तरह तरह की सलाह दे रहे है । लोगो को गलत पोस्ट से डरा भी रहे है। लेकिन छोटे मोटे बच्चो ने वेरीफाय सूचनाओं के आधार पर क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए उसकी ड्राइंग बनाई है। उसमे कलर भरकर गलत सही का फैसला कर सकते है।

ये अपनी तरह की विश्व की पहली पुस्तक है जो कोरोना पर आई है । इसे गिनीज बुक में भी दर्ज कराया जाएगा। साथ ही भारत सरकार द्वारा आयोजित कोरोना आईडिया 1 लाख अवार्ड में भी भेजा जाएगा। सोशल मीडिया के द्वारा देश के हर मोबाइल तक पीडीएफ पहुँचे ऐसा प्रयास किया जाएगा।

अंकिता, अन्वी माहेश्वरी, अंजलि राठी, भाविका माहेश्वरी, साराक्षी सोनी, आयुष, माधवने मिलकर इस पर कार्य किया। अभी हाल ही में स्कूल, कॉलेज बंद कर दिए है । बच्चे घरों में है उन्हें भी कोरोना के बारे में जिज्ञासा है । इस ड्राईंग कांसेप्ट द्वारा वो आसानी है समझ पाएंगे। बुक में सरकारी हेल्पलाइन सहित विज्ञापन भी डाला गया है। शब्दो की जगह चित्र ज्यादा प्रभावी होते है इसलिए बिना कोई मूल्य सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि कोई भी इसे उपयोग में ले सकेंगे। ड्रीम हाई प्री स्कूल ने इसे ड्राइंग सिलेबस में भी शामिल कर दिया है।

पूरे विश्व सब अपने अपनी संसाधनों के हिसाब से कोरोना से बचने का प्रयास कर रहे है। उसमें नन्हे मुन्नों ने अपना योगदान दिया है। कोरोना को आड़ में कुछ लोग जब जनता को लूट रहे है। कोई भी प्रोडक्ट कोरोना से समन्धित आसानी से बिक रहा है । ऐसे टाइम इस ड्राईंग बुक को पेरेंट्स के लिए बच्चें फ्री में उपलब्ध करा रहे है । साथ ही सरकार करोड़ों रुपए अवेरनेस पर ख़र्च कर रही है । ये अवेरनेस प्रामाणिक संदेश के साथ बड़ी मदद करेगी।

वैसे ये ड्राईंग बुक सभी के लिए उपयोगी है । लेकिन विशेषकर अभी छुट्टियों में बच्चे घरों में है उनके एमनुती पावर भी बालिग से कम होता है । वो कोई सावधानी भी नही रखते। उन्हें समझना भी मुश्किल काम है । इसलिए इस ड्राईंग बुक में कलर करके वो खुद गलत सही जान पायेंगे एवं सहपाठियों को बता पाएंगे समय का सदुपयोग भी कर सकेंगे।

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इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट समस्या से निपटने के लिए अहमदाबाद में चलाया गया क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन

अहमदाबाद: रिवर्स लॉजिस्टिक्स ग्रुप (आरएलजी), जो कि रिवर्स लॉजिस्टिक्स समाधानों की अग्रणी वैश्विक सेवा प्रदाता है, ने भारत में अपने प्रमुख अभियान ‘क्लीन टू ग्रीन’ की दूसरी पारी शुरू करने की घोषणा की। इस अभियान का उद्देश्य जिम्मेदार संगठनों के साथ भागीदारी करके रीसाइक्लिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सुरक्षित प्रथाओं के जिम्मेदार निपटान पर जागरूकता और संवेदनशीलता पैदा करना है।

क्लीन टू ग्रीन अभियान के दूसरे वर्ष के बारे में बोलते हुए सु श्री राधिका कालिया, प्रबंध निदेशक, आरएलजी इंडिया ने कहा, “हमें पिछले साल फ्लैगशिप अभियान की सफलता से प्रोत्साहन मिला। वित्त वर्ष 2019-20 में हम व्यक्तियों और पेशेवरों को यह सुनिश्चित करने के लिए क्लीन टू ग्रीन अभियान की पहुंच का विस्तार करना चाहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स का उचित निपटान और पुनर्चक्रण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है और जनता के बीच ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान के बारे में जागरूकता की कमी गंभीर मुद्दा है।”

इस अभियान के दूसरे वर्ष के शुभारंभ पर बोलते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निदेशक डॉ संदीप चटर्जी ने कहा, “क्लीन टू ग्रीन अभियान जिम्मेदार निपटान और रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और कॉर्पोरेट निकायों के साथ सहयोग करना चाहता है।

आरएलजी इंडिया से जुड़े निर्माता / ब्रांड माइक्रोसॉफ्ट, कैनन, एलजी, लेनोवो, गोदरेज, ब्रदर, सीमेंस, हायर, ओनिडा, आईएफबी, टेक्सलाविज़न, वीडोटेक्स, तनु, जी मोबाइल्स, एस मोबाइल्स, विज़िन, वोल्टासबे को एंड सोलवीयर, और एक्सपीडिशन हैं। अभियान ई-कचरे के सुरक्षित निपटान को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से उनके साथ काम करेगा।

क्लीन टू ग्रीन कैम्पेन के तहत अहमदाबाद के 32 स्कूलों में  25,500 से अधिक लोगों को ई-वेस्ट हैंडलिंग और डिस्पोसल के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इन स्कूलों के नाम डीएल रावल स्कूल, विजयनगर हाई स्कूल, सरदार पटेल हाई स्कूल, नूतन गुजराती मीडियम स्कूल, आदर्श गुजराती प्राथमिक विद्यालय हैं।

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