chandrayaan 2 movie

चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट 2008 में मंजूर हुआ, 2013 में रूस ने हाथ खींचे और लैंडर-रोवर देने से इनकार कर दिया

नई दिल्ली, जेएनएन। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही संपर्क टूट गया, लेकिन सवा अरब भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। एक समय जिस इसरो को विकसित देशों ने अपनी तकनीकें देने से मना कर दिया था, आज वही इसरो अपनी टेक्नोलॉजी का डंका बजा रहा है।

…जब इसरो के कंट्रोल रूम में पसर गया सन्नाटा
शुक्रवार रात डेढ़ बजे शुरू हुई विक्रम के सॉफ्ट लैंडिंग की प्रक्रिया सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। लैंडर विक्रम जब चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था, तो अचानक इसरो के कंट्रोल रूम में सन्नाटा पसर गया। वैज्ञानिकों के चेहरे लटक गए। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या। दरअसल स्क्रीन पर आ रहे आंकड़े अचानक थम गए थे। तभी इसरो चीफ सिवन वहां बैठे पीएम मोदी की तरफ बढ़े। उन्होंने पीएम को ब्रीफ किया और बाहर निकल गए। इससे अटकलें लगने लगीं कि आखिर हुआ क्या है। कुछ ही देर में इसरो ने कंट्रोल रूप से अपनी लाइव स्ट्रीमिंग भी बंद कर दी। इससे बेचैनी और बढ़ गई।

नई दिल्ली, जेएनएन। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही संपर्क टूट गया, लेकिन सवा अरब भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। इस अभियान के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। एक समय जिस इसरो को विकसित देशों ने अपनी तकनीकें देने से मना कर दिया था, आज वही इसरो अपनी टेक्नोलॉजी का डंका बजा रहा है।

…जब इसरो के कंट्रोल रूम में पसर गया सन्नाटा
शुक्रवार रात डेढ़ बजे शुरू हुई विक्रम के सॉफ्ट लैंडिंग की प्रक्रिया सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। लैंडर विक्रम जब चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था, तो अचानक इसरो के कंट्रोल रूम में सन्नाटा पसर गया। वैज्ञानिकों के चेहरे लटक गए। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या। दरअसल स्क्रीन पर आ रहे आंकड़े अचानक थम गए थे। तभी इसरो चीफ सिवन वहां बैठे पीएम मोदी की तरफ बढ़े। उन्होंने पीएम को ब्रीफ किया और बाहर निकल गए। इससे अटकलें लगने लगीं कि आखिर हुआ क्या है। कुछ ही देर में इसरो ने कंट्रोल रूप से अपनी लाइव स्ट्रीमिंग भी बंद कर दी। इससे बेचैनी और बढ़ गई।

भविष्य में विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर कितना काम करेंगे, इसका तो डेटा एनालिसिस के बाद ही पता चलेगा. इसरो वैज्ञानिक अभी यह पता कर रहे हैं कि चांद की सतह से 2.1 किमी ऊंचाई पर विक्रम अपने तय मार्ग से क्यों भटका. इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि विक्रम लैंडर के साइड में लगे छोटे-छोटे 4 स्टीयरिंग इंजनों में से किसी एक ने काम न किया हो. इसकी वजह से विक्रम लैंडर अपने तय मार्ग से डेविएट हो गया. यहीं से सारी समस्या शुरू हुई, इसलिए वैज्ञानिक इसी प्वांइट की स्टडी कर रहे हैं.

इसके अलावा चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रिजोल्यूशन कैमरा (OHRC) से विक्रम लैंडर की तस्वीर ली जाएगी. यह कैमरा चांद की सतह पर 0.3 मीटर यानी 1.08 फीट तक की ऊंचाई वाली किसी भी चीज की स्पष्ट तस्वीर ले सकता है.

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