Tag Archives: Modi

The Economist critises Narendra Modi on Economic and Internal Affairs

नरेन्द्र मोदी भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र दोनों को बर्बाद कर रहे हैं- द इकोनॉमिस्ट

वॉशिंगटन। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों की आलोचना की है। पत्रिका के प्रिंट सेक्शन में ‘लीडर्स’ कॉलम में प्रकाशित इस आलेख में भारत की बिगड़ती कानून व्यवस्था और गिरती हुई अर्थव्यवस्था की ओर इशारा किया गया है।

(आलेख का हिन्दी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत है जो ‘द इकोनॉमिस्ट’ की वेबसाइट से https://www.economist.com/leaders/2019/10/24/narendra-modi-is-damaging-indias-economy-as-well-as-its-democracy से लिया गया है। हम इस आलेख से सहमत नहीं हैं और यह सिर्फ समाचार प्रस्तुत करने की नीयत से प्रकाशित किया जा रहा है।)

जम्मू-कश्मीर में दबंगों की कहानियां और असम में लाखों गरीबों और ज्यादातर मुस्लिम लोगों की नागरिकता छीनने की धमकी, नौकरशाही द्वारा जातीय सफाई का एक अभियान चलाना, यह दुनिया जान चुकी है। लेकिन कई पश्चिमी व्यवसायी अभी भी बचाव के लिए इच्छुक नहीं हैं। भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भले ही लोकतंत्र के लिए अच्छे साबित नहीं हो रहे हैं, लेकिन वे कहते हैं, उनका व्यापार-दर्शन अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है। लेकिन, जैसा कि इस सप्ताह हमारी विशेष रिपोर्ट में तर्क दिया गया है, वह तर्क अब बेकार नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था अक्षम रूप से प्रबंधित है और बुरी तरह से घट रही है।

हालिया तिमाही में विकास दर पिछले साल के बीच के 8% से घटकर 5% साल-दर-साल हो गई। यह बहुत बुरा नहीं लगता होगा क्योंकि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी पीड़ित हैं, लेकिन भारत को अपने विशाल कार्यबल को पूरी तरह से नियोजित रखने के लिए तेजी से बढ़ने की जरूरत है। इससे भी बदतर, मंदी लंबे समय से जाने का नाम नहीं ले रही है।

‘द इकॉनोमिस्ट’ ने एक ग्राफिक के जरिये भी भारत की गिरती सकल घरेलु उत्पाद दर का दर्शाया है।

कुछ बैंक और कई अन्य ऋणदाता संकट में हैं। कुल 200 अरब डॉलर का पहाड़ भारत की अर्थ व्यवस्था पर है। सितंबर में समाप्त होने वाले छह महीनों में, व्यवसायों को वित्तपोषण का कुल प्रवाह 88% तक गिर गया है। भारतीय रिजर्व बैंक, केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार पांच दरों में कटौती, वाणिज्यिक उधार दरों को खींचने में विफल रही है, और किसी भी मामले में कंपनियां निवेश नहीं कर रही हैं। उपभोक्ता मांग भी गिर गई है। कारों और मोटरबाइकों की बिक्री में 20% या उससे अधिक की गिरावट आई है और संघीय सरकार और राज्यों के संयुक्त राजकोषीय घाटे के साथ पहले से ही 9% की जीडीपी आ रही है, और कर प्राप्ति अपेक्षाओं से बहुत नीचे गिर रही है। बाज़ार के उठने की बहुत कम गुंजाइश है।

जब 2014 में पहली बार सत्ता संभाली तो मोदी की सरकार को बहुत सारी समस्याओं के साथ एक अर्थव्यवस्था विरासत में मिली, लेकिन इसमें सुधार नहीं किया गया। नवीनतम मंदी जारी है निराशाजनक अंदाज़ में जारी है। इस महीने के शुरू में कॉर्पोरेट करों में भारी कटौती यानी 25 % के अपवाद के साथ इसकी आधिकारिक प्रतिक्रिया बदसूरत और डरपोक रही है। भारत इस मामले कई अन्य देशों के साथ कतार में खड़ा है। आलोचक कहते हैं कि मोदी की सरकार में विशेषज्ञता की असामान्य कमी है और अपने सर्कल में परस्पर विरोधी विचारों दोनों को दर्शाते हैं, क्योंकि प्रतिस्पर्धा समूह अपने काम बनान के लिए उत्सुक हैं। फिर भी वह जानते हैं कि क्या किया जाना चाहिए।

श्री मोदी को सबसे शुरू में एक ऐसी आर्थिक टीम की भर्ती करनी चाहिए जो भारतीय जनता पार्टी की हिंदू-राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए आत्मीयता के बजाय योग्यता और अनुभव पर आधारित हो। यह वित्तीय संकट और मांग में गिरावट दोनों से निपटना जानती हो। बैंकिंग प्रणाली को ठीक करने के लिए, बैंकों और हल्के से विनियमित वित्तीय संस्थाएं जिन्हें हाल ही में उधार दिया गया है, को तनाव-परीक्षण करने की आवश्यकता है और जहां आवश्यक हो, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण किया जाए। आखिरकार, राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों का निजीकरण किया जा सकता है और वित्तीय संस्थाओं को अन्य उधारदाताओं के समान विवेकपूर्ण नियमों के तहत रखा जाता है।

एक व्यापक निजीकरण कार्यक्रम सरकार को वह धन देगा जो उसकी माँग को पूरा करने के लिए आवश्यक हो। संकटग्रस्त घरेलू आवश्यकता तक धन का प्रवाह करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (मनरेगा) का उपयोग करना चाहिए। दीर्घावधि में, कर प्रणाली, श्रम कानूनों, भूमि-स्वामित्व के विनियमन और फिडली, संरक्षणवादी टैरिफ सभी में आमूलचूल परिवर्तन किया जाना चाहिए।

इनमें से कई वस्तुएं दशकों से हर भारतीय सरकार की ‘टू-डू’ सूची में हैं। लेकिन स्थायित्व ही परिवर्तन के लिए जमीन तैयार करता है। मोदीजी की संसद पर पकड़ मज़बूत है, व्यापारियों से दोस्ती है और उन्हें मजबूत अर्थव्यवस्था भी चाहिए। भारत के पास एक नेता है जो शक्तिशाली है और बड़े सुधार के लिए कोशिश कर सकता है।

डर यह है कि, अर्थव्यवस्था के साथ पकड़ बनाने के बजाय, मोदी एक सुधारक के रूप में प्रस्तुत करना बंद कर देंगे और पूरी तरह से अपने परिवर्तनशील अहंकार को गले लगा लेंगे, छाती ठोकने वाले हिंदू राष्ट्रवादी के रूप में। अपने दूसरे कार्यकाल में, उन्होंने भारत के एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य को पहले ही समाप्त कर दिया है और असम से कथित घुसपैठिए निकालने की योजना को बाकी भारत में भी ले जाने की धमकी दे रहे हैं। भारत की बढ़ती आर्थिक समस्याओं के सामने, सांप्रदायिक शिकायतों पर मोदी का ध्यान और भी अधिक निंदनीय है। काश, वह अभी भी विपरीत निष्कर्ष निकालें।

(यह द इकोनॉमिस्ट के अपने विचार है। हम इन विचारों से सहमत नहीं हैं)

Reserve Bank of India

रिज़र्व बैंक की चेतावनी- आ रहा है बुरा वक्त

मुम्बई। रिज़र्व बैंक ने एक तरह से चेतावनी दे दी है कि भारतीय अर्थ व्यवस्था के लिए बुरा वक्त आ रहा है। आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट, अक्टूबर 2019 में यह भी कहा है कि घरेलू और दुनिया में मंदी ने मिलकर देश में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था जो पिछले कुछ तिमाहियों में काफी हद तक मंदा पड़ी है और मंदी के संकेत दिए गए हैं, निकट अवधि में कई और जोखिमों का सामना करने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “घरेलू और दुनिया में आर्थिक मंदी के संयोजन ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है, विशेष रूप से कुल मांग घट गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था का निकट भविष्य का दृष्टिकोण कई जोखिमों से भरा है।”

इसने कहा कि आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख सहारा निजी खपत है औऱ वह कई कारणों से कम हो गई है। “इस संदर्भ में, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे बड़े रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों का प्रदर्शन संतोषजनक से कम नहीं है। हाल ही में शुरू किए गए उपायों जैसे कि कॉर्पोरेट टैक्स दरों में तेज कटौती, आवास क्षेत्र के लिए परिसंपत्ति निधि, बुनियादी ढांचा निवेश निधि, कार्यान्वयन पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक जीएसटी रिफंड प्रणाली और निर्यात गारंटी के लिए धन मददगार होगा। “

यह भी कहा कि बैंक ऋण वृद्धि धीमी हो गई है और जोखिम में गिरावट और मांग में कमी के कारण वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए कुल फंड प्रवाह में गिरावट आई है। हालांकि, मौद्रिक नीति रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हालिया पुनर्पूंजीकरण क्रेडिट प्रवाह में सुधार के लिए अच्छी तरह से विकसित होता है, जो निजी निवेश गतिविधि को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

“इस बीच, वैश्विक अनिश्चितताओं ने घर में निवेश गतिविधि को कमजोर कर दिया है। व्यापार तनाव के आगे बढ़ने से निर्यात की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसके अलावा निवेश में देरी होने से भी नुकसान हो सकता है।”

Alka Tyagi , IT Officer in Mumbai

अंबानी परिवार को इनकम टैक्स का नोटिस देने वाली ऑफिसर है मुसीबत में, दफ्तर में चोरी

मुम्बई। इस साल मई में मुकेश अम्बानी के परिवार क नोटिस देने वाली महिला अधिकारी बहुत परेशान चल रही है। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी में बयान की है। आपको बता दें कि इनकम टैक्स को लेकर मुम्बई की मुख्य आयकर आयुक्त (यूनिट 2) की अधिकारी अलका त्यागी ने यह शिकायत की है कि विभाग के प्रमुख उन पर बहुत दबाव बना रहे हैं और उनके ऑफिस से भी कुछ फाइलें चोरी हो गई हैं।

इस बारे में फेसबुक पर वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मालवीय ने पूरे मामले को समझाते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर मामला का खुलासा किया है। पेश है गिरीश मालवीय की पूरी फेसबुक पोस्ट-

(फेसबुक पोस्ट का लिंक- https://www.facebook.com/girish.malviya.16/posts/2715875205110777)

मुकेश अम्बानी परिवार को मई 2019 में ब्लैक मनी एक्ट में इनकम टैक्स विभाग से नोटिस भेजा गया!…. यह खबर याद होगी आपको ! ……..कुछ दिन पहले यह खबर आयी थी तो सहसा किसी को विश्वास नही हुआ था, मोदीराज में अम्बानी परिवार को नोटिस भेजा गया है यह सुनकर मोदी समर्थक बल्लियों उछल पड़े, इस खबर को हाथों हाथ लिया गया और हम जैसे लोगो को खूब लानत मलामत भेजी गई ……….

कुछ दिन बाद खबर आई कि मुम्बई की मुख्य आयकर आयुक्त (यूनिट 2) पद पर कार्यरत अलका त्यागी जिनके पास यह केस था उनके दफ्तर में चोरी हो गयी है लेकिन इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नही कराई गई है यही अधिकारी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर- ICICI केस, ओर अंबानी परिवार से जुड़े ब्लैक मनी एक्ट संबंधी मामले समेत कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रही थी ओर इस चोरी के बाद अब यह किस्सा खत्म ही समझ लिया जा रहा था

लेकिन पिक्चर अभी बाकि है मेरे दोस्त……..

दो दिन पहले यह खबर आई है कि जिस अधिकारी अलका त्यागी के पास यह केस था उनके ऊपर बहुत प्रेशर बनाया जा रहा था और इस आशय की चिठ्ठी उन्होंने 21 जून को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजी है उन्होंने इस शिकायत की CC उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और कैबिनेट सेक्रेटरी को भी भेजी है।

अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, त्यागी की ओर से वित्त मंत्री को 9 पन्नों की शिकायत भेजी गई है और इसमें आरोप लगाया गया है कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी की ओर से उन पर बहुत ज़्यादा ‘दबाव’ बनाया जा रहा है, सीबीडीटी इनकम टैक्स के मामलों में निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था है।

अपनी चिट्ठी में अलका त्यागी ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

त्यागी ने आरोप लगाया है कि 2019 के अप्रैल के अंतिम और मई के शुरुआती हफ़्ते में मोदी ने उन्हें बताया कि संवेदनशील आकलन के मामलों में की जा रही कार्रवाई को बंद किया जाना है और यह काम हर हालत में मई 2019 से पहले ही होना है !………..प्रमोद चंद्र मोदी का यह निर्देश बेहद चौंकाने वाला था। मोदी ने निर्देश दिये थे कि जिस मामले को बंद करने को कहा है उसमे क़तई इस बात का ज़िक्र नहीं होना चाहिए कि वह (मोदी) कहीं से भी इसमें शामिल हैं। त्यागी ने कहा है कि सीबीडीटी चेयरमैन ने उन पर इस मामले को बंद करने के लिए बहुत ज़्यादा दबाव बनाया और कहा कि किसी भी क़ीमत पर इस मामले को बंद किया जाए।

इसी अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने इस महीने की शुरुआत में ही ख़बर दी थी कि अलका त्यागी ने उनके दफ़्तर में संदिग्ध कार्रवाई के बारे में प्रिंसिपल चीफ़ कमिश्नर एस. के. गुप्ता को लिखित शिकायत भेजी थी। त्यागी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि एक पुराने मामले को लेकर उन पर दबाव बनाया जा रहा है और इस मामले को ख़ुद सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद मोदी ने ही निरस्त कर दिया था और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।

अलका त्यागी ने आरोप लगाया है कि बाद में मोदी ने इस मामले को फिर से खोल दिया और अब ब्लैकमेलिंग के हथियार के तौर पर उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा रहा है।

त्यागी ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इन बातों का ख़ुलासा करना पड़ेगा लेकिन उन्हें सीबीडीटी चेयरमैन के जोड़ तोड़ और बेईमानी भरे व्यहार की वजह से ऐसा करना पड़ा। उन्होंने प्रमोद चंद्र मोदी पर यह भी आरोप लगाया है कि जो अफ़सर उनकी बात को नहीं मानते थे वह उनके ख़िलाफ़ झूठी शिकायतें बना देते थे।

त्यागी ने कहा है कि एक बार मोदी ने उन्हें रात को 8.45/9 के बीच नॉर्थ ब्लॉक में अपने दफ़्तर में मीटिंग के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने इतनी रात को जाने से मना कर दिया। उन्होंने पत्र में लिखा है कि यह मीटिंग किसी और वक्त भी हो सकती थी।

यह पत्र अलका त्यागी ने 21 जून को भेजा था अब यदि आप सोच रहे है कि इस पत्र को मिलते ही ईमानदारी के अवतार कहे जाने वाले मोदीं जी ने तुरंत जाँच के आदेश दे दिए होंगे तो आपको बता दूं कि ऐसा बिल्कुल भी नही है बल्कि यह शिकायत के मिलने के दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार ने प्रमोद चन्द्र मोदी का सीबीडीटी चेयरमैन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है और अलका त्यागी को लूप लाइन में भेज दिया है उन्हें मुंबई से हटाकर नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी का प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल (ट्रेनिंग) बना दिया गया।

एक बात और……. अलका त्यागी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि प्रमोद चन्द्र मोदी ने उनके सामने कबूला है कि विपक्षी पार्टी के एक नेता के खिलाफ उनकी अगुवाई में चलाए गए एक कामयाब छापे की वजह से उनका सीबीडीटी चेयरमैन का उनका पद सुनिश्चित हुआ……..

मोदी का ‘लाइव’ रोका, दूरदर्शन अधिकारी कर दी गई निलम्बित

मोदी का ‘लाइव’ रोका, दूरदर्शन अधिकारी कर दी गई निलम्बित

चैन्नई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चैन्नई में आईआईटी के दौरान चल रहे भाषण के दौरान दूरदर्शन ने उनका लाइव रोक दिया। इसकी क़ीमत दूरदर्शन महिला अधिकारी को निलम्बित होकर चुकानी पड़ी है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के काफिले की जांच करने गए आईएएस ऑफिसर मुहम्मद मोहसिन के बाद यह दूसरा मामला है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में कथित ‘विघ्न’ डालने पर किसी अधिकारी पर कोई गाज गिरी है।

आईआईटी मद्रास के छप्पनवें दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भाषण दे रहे थे, दूरदर्शन चैन्नई की सहायक निदेशक श्रीमती आर वसुमथी ने कथित तौर पर यह लाइव प्रसारण बीच मे रुकवा दिया। इस बात की बहुत संभावना है कि इसी वजब से वसुमथी को नौकरी से निलम्बित कर दिया गया। हालांकि दूरदर्शन की तरफ से ना तो कोई पुष्टि की जा रही है और ना ही वसुमथी ने इस बारे में कोई बयान दिया है। प्रसार भारती के सीईओ ऑफिस से जारी आदेश में वसमुथी को शहर छोड़ने से भी रोका गया है। वसुमथी को थमाए गए पत्र में प्रसार भारती ने साफ किया है कि इसे हिरासत नहीं माना जाए।

वसुमथी के निलम्बन के दौरान वह अगले आदेश तक ऑफिस नहीं जा पाएंगी और ना ही वह किसी भी प्रकार के सरकारी आदेश जारी कर सकती हैं। निलम्बन के दौरान उन्हें घर पर ही रहना होगा और आधा वेतन लेने की हक़दार होगी।